Free Yojana 2026 बांस की खेती से बदलेगी किसानों की तकदीर, 60 हजार रुपये की सब्सिडी
खेती को फायदे का सौदा बनाने के लिए अब किसान पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर वैकल्पिक खेती की ओर रुख कर रहे हैं। इसी कड़ी में बांस की खेती किसानों के लिए नई उम्मीद बन रही है। कम लागत, कम देखभाल और लंबे समय तक मिलने वाली आमदनी के कारण बांस को आज खेती का भविष्य कहा जा रहा है। किसानों को इसी दिशा में प्रोत्साहित करने के लिए बिहार सरकार की ओर से राष्ट्रीय बांस मिशन योजना के तहत बांस की खेती पर 60,000 रुपये तक की सब्सिडी दी जा रही है। सरकार का रुख है कि इस योजना से न केवल किसानों की आय बढ़ेगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण स्तर पर नए उद्योगों को भी बढ़ावा मिलेगा।

क्यों खास है बांस की खेती
भारत में बांस की खेती तेजी से लोकप्रिय हो रही है। चीन के बाद भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा बांस उत्पादक देश है। इसके बावजूद कई राज्यों में किसान अब तक इसे बड़े पैमाने पर नहीं अपना पाए थे। बांस को कम पानी और कम खाद की जरूरत होती है, साथ ही यह फसल खराब मौसम में भी टिकाऊ साबित होती है। यही वजह है कि सरकार अब इसे आय बढ़ाने वाली फसल के रूप में आगे बढ़ा रही है।
बांस की खेती कितनी मिलेगी सब्सिडी
बिहार कृषि विभाग के अनुसार राष्ट्रीय बांस मिशन योजना के तहत एक हेक्टेयर क्षेत्र में बांस की खेती करने पर करीब 1.20 लाख रुपये का खर्च आता है। इस लागत का 50 प्रतिशत हिस्सा सरकारी अनुदान के रूप में वहन करेगी। यानी किसान को बांस की खेती के लिए 60,000 रुपये तक की सब्सिडी मिलेगी। इस सहायता से किसानों पर शुरुआती आर्थिक बोझ कम होगा और वे बिना जोखिम के बांस की खेती शुरू कर सकेंगे।
किन जिलों को सब्सिडी का लाभ मिलेगा
यह योजना बिहार के 27 जिलों में लागू की गई है। इनमें अररिया, बांका, बेगूसराय, भागलपुर, दरभंगा, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, जमुई, कटिहार, खगड़िया, किशनगंज, लखीसराय, मधेपुरा, मधुबनी, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, पूर्णिया, सहरसा, हिमाचलीपुर, सारण, शिवहर, शेखपुरा, सीतामढ़ी, सिवान, सुपौल, वैशाली और पश्चिम चंपारण शामिल हैं। सरकार का लक्ष्य है कि इन जिलों में किसान पारंपरिक खेती के साथ बांस को जोड़कर अपनी आमदनी बढ़ाए।
कौन उठा सकता है योजना का लाभ
राष्ट्रीय बांस मिशन योजना का लाभ पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर दिया जाएगा। खास बात यह है कि एक ही परिवार में पति और पत्नी दोनों इस योजना का लाभ ले सकते हैं, लेकिन इसके लिए दोनों के नाम अलग-अलग जमीन और वैध भूमि स्वामित्व प्रमाण पत्र होना जरूरी है। वृहद बांस की खेती के लिए न्यूनतम 0.04 हेक्टेयर और अधिकतम 0.20 हेक्टेयर जमीन तय की गई है। वहीं खेत की मेड़ पर बांस लगाने के लिए हर किसान को कम से कम 10 पौधे लगाने होंगे। इससे छोटे और सीमांत किसानों को भी इस योजना से जोड़ा जा सकेगा।
बांस की खेती पर अनुदान पाने के लिए कैसे करें आवेदन
इस योजना के लिए आवेदन प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन रखा गया है। किसान बिहार उद्यान निदेशालय की आधिकारिक वेबसाइट horticulture.bihar.gov.in पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। वेबसाइट पर ‘राष्ट्रीय बांस मिशन योजना’ से जुड़े लिंक पर क्लिक कर आवेदन फॉर्म भरना होगा और जरूरी डॉक्यूमेंट अपलोड करने होंगे। आवेदन जमा होने के बाद जिला स्तर पर उसकी जांच की जाएगी। पात्र पाए जाने पर ही किसान के खाते में सब्सिडी की राशि जारी की जाएगी।
योजना की अधिक जानकारी के लिए कहां करें संपर्क
राज्य के जो किसान योजना से जुड़ी अधिक जानकारी चाहते हैं, वे अपने जिले के कृषि या बागवानी विभाग कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं। इसके अलावा राज्य सरकार की आधिकारिक वेबसाइट पर भी योजना से संबंधित सभी दिशा-निर्देश उपलब्ध हैं।
बांस की खेती साबित हो सकती है फायदे का सौदा
बांस की खेती कम देखभाल में लंबे समय तक लाभ देने वाली फसल मानी जाती है। यह 3 से 5 साल में पूरी तरह तैयार हो जाती है और उसके बाद कई दशकों तक लगातार उत्पादन देती है। फर्नीचर, कागज उद्योग, निर्माण कार्य और हस्तशिल्प जैसे क्षेत्रों में बांस की मांग लगातार बढ़ रही है, जिससे किसानों को बाजार में अच्छी कीमत मिलती है। ऐसे में राष्ट्रीय बांस मिशन योजना बिहार के किसानों के लिए आय बढ़ाने का एक मजबूत विकल्प बनकर सामने आया है। सरकार की सब्सिडी और बाजार में बढ़ती मांग को देखते हुए बांस की खेती आने वाले समय में किसानों के लिए स्थायी और सब्सिडी खेती साबित हो सकती है।
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